OPIUM FARMING 2025
13, Feb 2025
अफ़ीम की खेती OPIUM KI KHETI 2025

अफ़ीम की खेती OPIUM KI KHETI 2025

भूमिका

अफीम (Opium) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसकी खेती विशेष रूप से भारत के कुछ हिस्सों में नियंत्रित रूप से की जाती है। अफीम पोस्ते (Papaver somniferum) से प्राप्त की जाती है और इसका उपयोग विभिन्न औषधियों, दर्द निवारक दवाओं और अन्य औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। भारत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत अफीम की खेती की अनुमति दी जाती है।

अफीम की खेती की प्रक्रिया

1. जलवायु और मिट्टी

अफीम की खेती के लिए समशीतोष्ण और शुष्क जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है, जिसमें उचित जल निकास हो। pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

2. बुवाई का समय

अफीम की खेती आमतौर पर अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है। फसल पकने का समय 120-150 दिनों का होता है, और मार्च-अप्रैल में कटाई की जाती है।

3. बीज चयन और बुवाई

  • उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का चयन किया जाना चाहिए।
  • बीजों को पंक्तियों में बोया जाता है, जिनकी दूरी 25-30 सेमी होती है।
  • बीजों को हल्की नमी वाली मिट्टी में बोया जाना चाहिए।

4. सिंचाई और खाद

  • शुरुआती चरण में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन पौधे के विकास के दौरान पानी की अधिकता से बचना चाहिए।
  • नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करना आवश्यक है।

5. देखभाल और रोग नियंत्रण

  • फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए जैविक और रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।
  • सामान्य रोगों में फफूंदी, पत्ती धब्बा रोग, और जड़ सड़न प्रमुख हैं।

अफीम की कटाई और प्रसंस्करण

जब पौधों पर फली पकने लगती है, तो इन पर चीरा लगाकर लेटेक्स (दूधिया रस) निकाला जाता है। यह रस सुखाने के बाद एकत्र किया जाता है और प्रसंस्करण के लिए सरकारी एजेंसियों को दिया जाता है।

भारत में अफीम की खेती के कानूनी पहलू

भारत में अफीम की खेती पर सरकार द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाती है। यह केवल उन्हीं किसानों को करने की अनुमति है, जिन्हें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से लाइसेंस प्राप्त होता है। किसी भी अनधिकृत तरीके से अफीम उगाना गैरकानूनी होता है और कठोर दंड का प्रावधान है।

अफीम की खेती के आर्थिक लाभ

  • नियंत्रित और कानूनी खेती से किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त हो सकता है।
  • चिकित्सा उद्योग में इसकी बड़ी मांग बनी रहती है।
  • सरकार से मिलने वाले अनुदान और समर्थन से लाभ हो सकता है।

निष्कर्ष

अफीम की खेती एक लाभकारी लेकिन संवेदनशील कृषि प्रक्रिया है। इसकी खेती करने से पहले कानूनी प्रावधानों को समझना और पालन करना आवश्यक है। यदि सही तरीके से किया जाए, तो यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन सकता है।

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